सेवा के पंख फैलाए निरंतर नई उड़ान भरने के लिए तैयार
1947 में जब हमारे बुजुर्ग सिन्ध से निकले तो उनके पास ना पैसा था, न संपत्ति थी। वहां हमारे पास अपने कई संसाधन थे, परंतु वहां से निकलते समय हमारे बुजुर्ग अपने साथ सिर्फ अपनी बोली, संस्कृति और सभ्यता ही साथ ला पाए, जिसे सहजने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का दायित्व उन पर था, जो हमारे बड़ों ने बखूबी निभाया।
गुजरातियों को गुजरात मिला, पंजाबियों को पंजाब मिला, बंगालियों को बंगाल मिला, मराठों को महाराष्ट्र मिला, नहीं मिला तो हम सिन्धियों को सिन्ध नहीं मिला। लेकिन फिर भी सिन्धी समाज ने एक नई शुरुआत की, शून्य से शिखर तक का सफर तय किया और आज भी निरंतर हर क्षेत्र में हम आगे बड़ रहे हैं।
परंतु इस सफर में महसूस किया गया कि हमसे कहीं कुछ छूट तो नहीं रहा… हमने यहां आकर संसाधन तो वापस इकट्ठे कर लिए लेकिन समय के इस चक्र में अब हमें आपसी मेल-मिलाप, अपनी संस्कृति को सहजने और अगली पीढ़ी को इससे रूबरू कराने की जरूरत थी।
तब 1998 में सोचा गया की एक दिन के लिए ही सही, पर हम अपनी नई पीढ़ी के लिए छोटा सिन्ध बनाएं और उन्हें अपनी परम्पराओं और संस्कारों से अवगत कराएं। तब पहली बार सुंदर वन नर्सरी के प्रांगण में एक दिवसीय सिन्धी मेले का आयोजन किया गया, जिसे भोपाल के सिन्धी समाज ने अत्यंत सराहा। विगत 27 वर्षों से ये पारिवारिक सिन्धी मेला निरंतर नवीन प्रयोगों के साथ प्रदेश में ऊंचाइयों के मुकाम पर पहुंचा है।
इसके पश्चात् युवाओं तथा महिलाओं की भावना के अनुरूप वर्ष 2007 में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर गरबा महोत्सव का तीन दिवसीय आयोजन भी सुंदर वन नर्सरी में किया गया (हम जानते ही है कि गरबा और सिन्धी लोकनृत्य छेज में काफी समानता है), इस कार्यक्रम को भी भारी सफलता मिली और अब यह प्रतिवर्ष चार दिन होता है।
इसके पश्चात् शिक्षा, खेल, साहित्य इत्यादि क्षेत्रों की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से वर्ष 2009 में प्रतिभा सम्मान तथा महिलाओं की रुचि को ध्यान में रखकर कुकिंग कॉम्पीटिशन का आयोजन किया गया। इससे अनेक लुप्त हो रहे सिन्धी व्यंजनों का स्वाद हम सभी ले सकें। साथ ही मकर संक्रांति के अवसर पर पतंग महोत्सव का भी आयोजन शुरू किया गया।
इन कार्यक्रमों से समाज ने एक नया बदलाव महसूस किया और साथ ही कार्यकर्ताओं का भी मनोबल बढ़ा।
वर्ष 2012 में मेले के 15 वें वर्ष में सिन्धु प्रवाह स्मारिका का प्रकाशन किया गया जिसे सम्पूर्ण भारत वर्ष में सिन्धी समाज के विशिष्ट केन्द्रों, पंचायतों तथा हस्तियों ने पढ़ा, पसंद किया व समिति को अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित की।
16 वें वर्ष में सिन्धी मेला समिति द्वारा टेलीफोन डायरेक्टरी का प्रकाशन किया गया जिसमें 880 सदस्यों के नाम, उनके सम्पर्क नम्बर एवं ब्लड ग्रुप अंकित है। इस डायरेक्टरी के माध्यम से अनेक जरुरतमंद लोगों को रक्त उपलब्ध कराया गया है, जिससे कई रोगियों की प्राणरक्षा संभव हुई है। इस कार्य से समाज व शहरवासियों के मन में मेला समिति की पहचान सेवा प्रकल्प के रूप में हुई है।
मेला समिति के निरंतर होते कार्य विस्तार की कड़ी के रूप में समय के साथ मजबूत SMS महिला एवं युवा विंग भी तैयार हो चुकी है।
युवाओं की रुचि को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2024 में समिति ने खेल के क्षेत्र में अपना पहला कार्यक्रम SMS TCL (टर्फ क्रिकेट लीग) का चार दिवसीय आयोजन मई 2024 में किया।
और साथ ही समय की जरूरत को देखते हुए, युवाओं की सॉफ्ट स्किल्स को विकसित करने और रोज़गार दिलवाने हेतु समिति ने अब SMS Placement Cell का भी शुभारंभ किया है, जिसका प्रथम कार्यक्रम जून 2024 में आयोजित किया गया। हमें विश्वास है युवाओं को रोज़गार दिलवाने में समिति की यह पहल भी नए आयाम हासिल करेगी।
समिति के सदस्यों के लिए साल में एक बार पारिवारिक पिकनिक का भी आयोजन किया जाता है।
वर्ष 2025 में समिति ने पहली बार सिन्धी मैराथन 2025 का आयोजन किया जो कि चैतीचांद और शहीद हेमू कालाणी जी के जन्मोत्सव को समर्पित की गई।
एक वृहद् लक्ष्य लेकर मेला समिति कार्य कर रही है, जिसे सम्पूर्ण समाज का आर्शीवाद एवं सहयोग प्राप्त है।
सिन्धी मेला समिति हमेशा से ही शालीनता का पर्याय रही है, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को सामाजिक स्तर पर आयोजित करके, युवाओं को अपनी भाषा एवं जड़ों से जोड़ने के संकल्प के साथ काम करती रही है।
श्री भगवान दास सबनानी जी के निर्विरोध 22 वर्ष अध्यक्षता संभालने के बाद 2020 में सिन्धी मेला समिति की डोर मनीष दरयानी के हाथों में सौपी गई।
समिति के सभी साथी समाज को यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि सिन्धी मेला समिति (SMS) केवल कार्यक्रमों तक अब सीमित नहीं रही है, वरन् आवश्यकता पड़ने पर किसी भी क्षेत्र में समाज की हर संभव मदद के लिए एक सशक्त सेना के रूप में मौजूद है।
समय के हिसाब से बदलते युग में भी अपने समाज को जड़ों से जोड़े रखने के लिए समिति अपने पंख फैलाए निरंतर नई उड़ान भरने के लिए सदैव तैयार है।
गुजरातियों को गुजरात मिला, पंजाबियों को पंजाब मिला, बंगालियों को बंगाल मिला, मराठों को महाराष्ट्र मिला, नहीं मिला तो हम सिन्धियों को सिन्ध नहीं मिला। लेकिन फिर भी सिन्धी समाज ने एक नई शुरुआत की, शून्य से शिखर तक का सफर तय किया और आज भी निरंतर हर क्षेत्र में हम आगे बड़ रहे हैं।
परंतु इस सफर में महसूस किया गया कि हमसे कहीं कुछ छूट तो नहीं रहा… हमने यहां आकर संसाधन तो वापस इकट्ठे कर लिए लेकिन समय के इस चक्र में अब हमें आपसी मेल-मिलाप, अपनी संस्कृति को सहजने और अगली पीढ़ी को इससे रूबरू कराने की जरूरत थी।
तब 1998 में सोचा गया की एक दिन के लिए ही सही, पर हम अपनी नई पीढ़ी के लिए छोटा सिन्ध बनाएं और उन्हें अपनी परम्पराओं और संस्कारों से अवगत कराएं। तब पहली बार सुंदर वन नर्सरी के प्रांगण में एक दिवसीय सिन्धी मेले का आयोजन किया गया, जिसे भोपाल के सिन्धी समाज ने अत्यंत सराहा। विगत 27 वर्षों से ये पारिवारिक सिन्धी मेला निरंतर नवीन प्रयोगों के साथ प्रदेश में ऊंचाइयों के मुकाम पर पहुंचा है।
इसके पश्चात् युवाओं तथा महिलाओं की भावना के अनुरूप वर्ष 2007 में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर गरबा महोत्सव का तीन दिवसीय आयोजन भी सुंदर वन नर्सरी में किया गया (हम जानते ही है कि गरबा और सिन्धी लोकनृत्य छेज में काफी समानता है), इस कार्यक्रम को भी भारी सफलता मिली और अब यह प्रतिवर्ष चार दिन होता है।
इसके पश्चात् शिक्षा, खेल, साहित्य इत्यादि क्षेत्रों की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से वर्ष 2009 में प्रतिभा सम्मान तथा महिलाओं की रुचि को ध्यान में रखकर कुकिंग कॉम्पीटिशन का आयोजन किया गया। इससे अनेक लुप्त हो रहे सिन्धी व्यंजनों का स्वाद हम सभी ले सकें। साथ ही मकर संक्रांति के अवसर पर पतंग महोत्सव का भी आयोजन शुरू किया गया।
इन कार्यक्रमों से समाज ने एक नया बदलाव महसूस किया और साथ ही कार्यकर्ताओं का भी मनोबल बढ़ा।
वर्ष 2012 में मेले के 15 वें वर्ष में सिन्धु प्रवाह स्मारिका का प्रकाशन किया गया जिसे सम्पूर्ण भारत वर्ष में सिन्धी समाज के विशिष्ट केन्द्रों, पंचायतों तथा हस्तियों ने पढ़ा, पसंद किया व समिति को अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित की।
16 वें वर्ष में सिन्धी मेला समिति द्वारा टेलीफोन डायरेक्टरी का प्रकाशन किया गया जिसमें 880 सदस्यों के नाम, उनके सम्पर्क नम्बर एवं ब्लड ग्रुप अंकित है। इस डायरेक्टरी के माध्यम से अनेक जरुरतमंद लोगों को रक्त उपलब्ध कराया गया है, जिससे कई रोगियों की प्राणरक्षा संभव हुई है। इस कार्य से समाज व शहरवासियों के मन में मेला समिति की पहचान सेवा प्रकल्प के रूप में हुई है।
मेला समिति के निरंतर होते कार्य विस्तार की कड़ी के रूप में समय के साथ मजबूत SMS महिला एवं युवा विंग भी तैयार हो चुकी है।
युवाओं की रुचि को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2024 में समिति ने खेल के क्षेत्र में अपना पहला कार्यक्रम SMS TCL (टर्फ क्रिकेट लीग) का चार दिवसीय आयोजन मई 2024 में किया।
और साथ ही समय की जरूरत को देखते हुए, युवाओं की सॉफ्ट स्किल्स को विकसित करने और रोज़गार दिलवाने हेतु समिति ने अब SMS Placement Cell का भी शुभारंभ किया है, जिसका प्रथम कार्यक्रम जून 2024 में आयोजित किया गया। हमें विश्वास है युवाओं को रोज़गार दिलवाने में समिति की यह पहल भी नए आयाम हासिल करेगी।
समिति के सदस्यों के लिए साल में एक बार पारिवारिक पिकनिक का भी आयोजन किया जाता है।
वर्ष 2025 में समिति ने पहली बार सिन्धी मैराथन 2025 का आयोजन किया जो कि चैतीचांद और शहीद हेमू कालाणी जी के जन्मोत्सव को समर्पित की गई।
एक वृहद् लक्ष्य लेकर मेला समिति कार्य कर रही है, जिसे सम्पूर्ण समाज का आर्शीवाद एवं सहयोग प्राप्त है।
सिन्धी मेला समिति हमेशा से ही शालीनता का पर्याय रही है, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को सामाजिक स्तर पर आयोजित करके, युवाओं को अपनी भाषा एवं जड़ों से जोड़ने के संकल्प के साथ काम करती रही है।
श्री भगवान दास सबनानी जी के निर्विरोध 22 वर्ष अध्यक्षता संभालने के बाद 2020 में सिन्धी मेला समिति की डोर मनीष दरयानी के हाथों में सौपी गई।
समिति के सभी साथी समाज को यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि सिन्धी मेला समिति (SMS) केवल कार्यक्रमों तक अब सीमित नहीं रही है, वरन् आवश्यकता पड़ने पर किसी भी क्षेत्र में समाज की हर संभव मदद के लिए एक सशक्त सेना के रूप में मौजूद है।
समय के हिसाब से बदलते युग में भी अपने समाज को जड़ों से जोड़े रखने के लिए समिति अपने पंख फैलाए निरंतर नई उड़ान भरने के लिए सदैव तैयार है।
